11 Aug 2026, 02:38 UTC4 views2 reactionsread 11 August 2026 मलाल
एक दिन हम बन्दूक की गोली से नहीं
किसी सड़क दुर्घटना से नहीं
भूख या प्यास से नहीं
कर्मो के हिसाब से नहीं बल्कि
मारे जाएँगे उन सभी बातों से
जो जुबान तक आकर लौट गईं
उन सभी अधूरे कामों से
जिनको पूरा करने का बस
मलाल ही बचा रहा।
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10 Aug 2026, 02:27 UTC14 views4 reactionsread 11 August 2026 खाली दिमाग मतलब
शैतान का घर
खाली जेब मतलब
घर में शैतान
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8 Aug 2026, 03:32 UTC25 views3 reactionsread 11 August 2026 गायब है आजकल जीने की कला,
इंसान ही है इंसान से लगता भला।
बिना आग के हर इंसान अब जला,
सब बहक रहे यहाँ कौन संभला।
गायब है आजकल मन का गुरूर,
सबको लगते खट्टे मिले हुए अंगूर।
सब मीठे की आस में जीते ज़रूर,
जाने मन में बसा यह कैसा फ़ितूर।
गायब है आजकल नूर का सवेरा,
कौन समझ पाए अपना ही अंधेरा।
कहीं दूर दुनिया में सभी ढूँढे बसेरा,
और बस चल रहा हरदम तेरा-मेरा।
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7 Aug 2026, 02:35 UTC33 views3 reactionsread 11 August 2026 किसी से मेरी दुश्मनी नहीं है,
मतलब मेरे सब दोस्त हैं
कभी किसी से ठनी नहीं है,
मतलब मेरे सब दोस्त हैं
उम्मीदें किसी से रखनी नहीं हैं,
मतलब मेरे सब दोस्त हैं
प्रेम के सिवा आमदनी नहीं है,
मतलब मेरे सब दोस्त हैं
दुनियादारी समझनी नहीं है,
मतलब मेरे सब दोस्त हैं
custom 53526578866170180493
6 Aug 2026, 02:33 UTC39 views5 reactionsread 11 August 2026 दुनिया कितनी ख़राब है
कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि
दुनिया कितनी ख़राब है
यह सोचते हुए सहसा मेरी नज़र
कमरे के एक कोने पर लगे शीशे
पर चली जाती है उसके बाद,
लाख कोशिशों के बाद भी
मैं वह नहीं कह पाता
जो मैंने अभी-अभी कहा।
custom 49363724549446709675
5 Aug 2026, 02:31 UTC49 views3 reactionsread 11 August 2026 मैं ख़ुद से मिलने वाला था,
मैं ख़ुद को खोता जा रहा हूँ।
मैं अम्बर सजाने वाला था,
मैं अम्बर होते जा रहा हूँ।
तारों को छूने की ख़्वाहिश थी,
मैं तारा होते जा रहा हूँ।
समाज के दायरे लाँघने थे,
मैं समाज बनते जा रहा हूँ।
custom 54138254794067896313
4 Aug 2026, 02:47 UTC57 views3 reactionsread 11 August 2026 मिले जो लोग वो बेशक सही थे,
पर समय ठहरा नहीं था,
वहाँ चुप्पी बहुत थी,
और कोई सवाल गहरा नहीं था।
यह कहानी गवाह है कि
प्रेम से बढ़कर भी इक ज़मीं है,
आत्मसम्मान को खोकर तो
कोई भी ताल्लुक सुनहरा नहीं था
custom 62355824697986302913
3 Aug 2026, 02:25 UTC57 views3 reactionsread 11 August 2026 शब्द शब्द बहु अंतरा, शब्द के हाथ न पाँव।
एक शब्द करे औषधि, एक शब्द करे घाव ।
शब्द संभाले बोलिए, शब्द खींचते ध्यान ।
शब्द मन घायल करे, शब्द बढ़ाते मान ।
शब्द मुँह से छूट गया, शब्द न वापस आय ।
शब्द जो हो प्यार भरा, शब्द ही मन में समाएँ ।
शब्द ही कटुता रोक दें, शब्द ही बैर हटाएँ।
शब्द जोड़ दें टूटे मन, शब्द ही प्यार बढ़ाएँ।
custom 58776183174342946003
1 Aug 2026, 02:28 UTC56 views5 reactionsread 11 August 2026 कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता
तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो,
जहाँ उमीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता
कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें,
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं,
ज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता
चराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है,
ख़ुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता
custom 53526578866170180493custom 49363724549446709672
30 Jul 2026, 02:33 UTC47 views3 reactionsread 11 August 2026 वादा-ए-हूर पे बहलाए हुए लोग हैं हम !
ख़ाक़ बोलेंगे कि दफ़नाए हुए लोग हैं हम !!
यूं हर एक जुल्म पे दम साधे खड़े हैं जैसे,
दीवार में चुनवाए हुए लोग हैं हम !!
जिस का जी चाहे उंगली पे नचा लेता है,
जैसे बाज़ार से मंगवाए हुए लोग हैं हम !!
हंसी आए भी तो हंसते हुए डर लगता है,
ज़िंदगी यूं तेरे ज़ख्माए हुए लोग हैं हम !!
न आसमां अपना ज़मीं अपनी न सांस अपनी तो फ़िर,
जाने किस बात पे इतराए हुए लोग हैं हम !!
custom 54138254794067896313
29 Jul 2026, 02:29 UTC48 views3 reactionsread 11 August 2026 एक धुंधली याद, या आज की कहानी,
एक लंबी यात्रा, या पड़ाव की निशानी।
सुबह की किरण, या बसंत की फुहार,
उड़ता पंछी, या ठहरी हुई बहार।
ग़मों के बादल, या मुस्कुराती कली,
भीड़ का एक हिस्सा, या अपनी ही गली।
खुद की आँखों का दर्पण,
या लोगों की बातों का स्पंदन।
कभी सूरज की तपन,
तो कभी खुद को खोजता मन।
अंत में इन्हीं सवालों का विराम -
कौन हूँ मैं?
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28 Jul 2026, 02:35 UTC45 views5 reactionsread 11 August 2026 वक़्त
वक़्त ही की तो लड़ाई रही सभी को,
किसी ने वक़्त लिया,
किसी ने वक़्त दिया।
मगर संग बैठकर कहाँ
उस वक़्त को जिया।
कभी सही वक़्त पर वक़्त न दिया,
तो कभी ग़लत वक़्त कहकर वक़्त टाल दिया।
फ़र्क़ बस इतना था—
किसी ने वक़्त काटा, किसी ने वक़्त जिया।
आख़िर कमी वक़्त की कहाँ थी,
कमी तो किसी के लिए वक़्त निकालने की थी।
custom 58776183174342946005
Showing the 12 most recent of 20 posts we hold for @Pain_Is_Everything. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.