9 Feb 2023, 05:32 UTC≈1,190 viewsread 6 August 2026 ऐसा नहीं कि तेरे दिवाने नहीं हम
बस इन नज़रों से दिखाते नहीं हम
देख तुझे,ये दिल जैसे धड़कता है
ऐसे तो धड़कना सिखाते नहीं हम
लेते हैं सहारे इन इनायतों के हम
जज़्बातों से तुझे लिखाते नहीं हम
तौबा तौबा उफ़ अब हमारी तौबा
छोड़ो, जुल्म तेरे गिनाते नहीं हम
तेरी यादों में गुजरे तो गुजर जाये
ज़िंदगी यूं भी तो बिताते नहीं हम
हैसियत बढ़ ना जाये तेरी "दिव्या"
आँखें,ख्वाबों से जिताते नहीं हम
Signed Ahad shah
26 Oct 2022, 08:30 UTC≈1,590 viewsread 6 August 2026 “ये अलग बात है कि मुक़द्दर नहीं बदला अपना,
एक ही दर पे रहे…दर नहीं बदला अपना।”
🖤🖤🖤🖤🖤🖤
Signed Ahad shah
26 Oct 2022, 00:41 UTC≈1,540 viewsread 6 August 2026 "चाय वाली"
मेरे गाँव में सड़क के किनारे एक छोटी-सी चाय की दुकान थी । उस दुकान को एक महिला चलाती थी । वह इस गाँव की नहीं थी इसलिए उसका इस गाँव में उस छोटी-सी झोपड़ी के अलावा और कोई ठिकाना न था । वह अपना और अपने बच्चों का भरण-पोषण इसी छोटी-सी दुकान से करती थी । गाँव के सभी बच्चे, बूढ़े और जवान उसकी दुकान के ग्राहक थे । गाँव में कोई और चाय की दुकान भी तो नहीं थी ।
मैं जब अपने बचपन के दिनों को याद करती हूँ तो उन यादों म…
Signed Ahad shah
24 Oct 2022, 05:29 UTC≈1,250 viewsread 6 August 2026 गिर गए कुछ लोग मेरी नजरो से
अपने गुरुर और हरकतों की वजह से
Signed Ahad shah
24 Oct 2022, 05:28 UTC≈1,240 viewsread 6 August 2026 साथ जब भी छोड़ना
तो मुस्कुराकर छोड़ना ऐ दोस्तों
ताकि दुनिया ये ना समझे हम में दूरी हो गयी...
Signed Ahad shah
23 Oct 2022, 03:17 UTC≈1,290 viewsread 6 August 2026 चीर देते हैं लफ्ज़ नस्तर की तरह,
कर्ज़ उतरता ही नहीं इश्क़-ए-उधारी का ।
जानते सबकुछ है पर ख़ामोश रहते हैं,
बताएंगे कभी हुनर उनकी मक्कारी का ।
Signed Ahad shah
23 Oct 2022, 03:17 UTC≈1,270 viewsread 6 August 2026 कोशिश यही थी कि आदत पुराने छोड़ेंगे,
हमें पता नहीं था कि यार पुराने छोड़ेंगे ।
एक नेकी का दीवार तेरे दिल पर भी बना,
हम यादों के लिबास सारे पुराने छोड़ेंगे ।
Signed Ahad shah
15 Aug 2022, 17:07 UTC≈1,560 viewsread 6 August 2026 ख़्वाब नहीं वो आने दूँगा
जिसमें तुमको जाने दूँगा
बड़े दिनों के बाद मिले हो
ऐसे कैसे जाने दूँगा
सबको प्यार मुहब्बत वाले
गली गली अफ़साने दूँगा
तुमको इतनी आसानी से
क्या लगता है जाने दूँगा
बाद तुम्हारे इस जीवन में
और न कोई आने दूँगा
मुझको छोड़ के जाने वाला
आया अगर तो ताने दूँगा
चाहे अब जो भी हो जाए
उसको अब न सताने दूँगा
@Hindi_shayaris
Signed Digital shah
4 Oct 2021, 05:10 UTC≈2,870 viewsread 6 August 2026 खूब किताबें भरी लिख लिख कर अपना समय बिताया,
पर मेरे लेखन को जब पढ़ने वाला कोई न मिल पाया ।
तब कुछ एप्प तलाशने का विचार मेरे हृदय में आया,
तब जाकर टेलीग्राम व रेख़्ता ने रास्ता दिखाया ।
@Hindi_shayaris
Signed Digital shah
4 Oct 2021, 05:10 UTC≈2,770 viewsread 6 August 2026 एक खामोशी थी हमारे बीच,
जो कभी पटी नहीं ।
मसला अना का था वो डटा रहा,
और मैं भी हटी नहीं ।
@Hindi_shayaris
Signed Digital shah
4 Oct 2021, 05:09 UTC≈2,760 viewsread 6 August 2026 कब्र में हूँ ख़ुद मैं और,
जीवन जीने का आधार लिखती हूँ ।
ख़ुद बैठ अंधेरे में, मैं रूठी हुई,
रोशनी को मनाने का ढंग लिखती हूँ ।
कितनी शांत कुटिया में बैठी हूँ मैं,
और महलों की दीवारों का,
व्यवहार लिखती हूँ ।
सुनो ! कि अब बहुत लिख दी है,
मैंने कहानी झूठ की, चलो अब,
सच्चाई की दास्तान लिखती हूँ ।
सांझ चढ़ रही है इस बदल में,
चलो अब मैं सिसकती हुई,
साँसों की हुंकार लिखती हूँ ।
कि छूट न जाये कही,
ये अंजुम को यूँ,
हँसता हुआ देख…
Signed Digital shah
1 Oct 2021, 01:06 UTC≈2,430 viewsread 6 August 2026 हर चीज़ "हद" में अच्छी लगती हैं,
मगर तुम हो के "बे-हद" अच्छे लगते हो..!
@Hindi_Shayaris
Signed Digital shah
Showing the 12 most recent of 20 posts we hold for @Hindi_Shayaris. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.