3 Jul 2025, 04:38 UTC782 views13 reactionsread 8 August 2026 Forwarded from @manuvadibrahmanPhoto
Today is Death Anniversary of Lt. Manoj Pandey. Shat Shat Naman to him not because he has the PVC Award bestowed by the State but because he did not flinch a bit in the face of overwhelming odds of enemy's bullets and bombs and died a true Hero's death to ultimately win the war for his national. A genuine embodiment of the Brahmanical spirit and yet another testament to our unwavering courage, bravery and the tendenc…
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12 Apr 2024, 12:37 UTC≈2,810 views4 reactionsread 8 August 2026 https://youtu.be/g4UY3GCsJh0
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22 Jan 2024, 17:31 UTC≈3,110 views39 reactionsread 8 August 2026 Photo
जय श्री राम 🧡
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13 Oct 2022, 03:47 UTC≈4,530 views18 reactionsread 8 August 2026 Video
पदापियुवरतींभिक्षुर्नस्पृशेद्दारवीमपि।
(श्रीमद्भा० ११ । ८। १३)
सन्यासी लकड़ी से निर्मित स्त्री प्रतिमा का स्पर्श पैर से भी न करे।
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5 Sept 2022, 02:51 UTC≈2,510 views1 reactionsread 8 August 2026 गोपिचीरहरण पर रामभद्राचार्य की मूर्खता
हमने अभी रामभद्राचार्य का एक वीडियो देखा, जिसमें उसने श्रीकृष्ण द्वारा गोपियों के वस्त्रहरण की कुछ अलग ही अनर्गल प्रलाप तुल्य कथित व्याख्या की है। उस मूर्ख ने हमारे श्रीधर स्वामी, वल्लभाचार्य जी आदि को "अशिक्षित गधा" कहा है, भागवत के टीकाकारों को मूर्ख सिद्ध करने का कुप्रयास इस मन्दमति ने किया है। श्रीकृष्ण ने गोपियों को "बहन" सम्बोधित किया, ऐसा भी इस दुर्बुद्धि का कहना है। अब …
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5 Sept 2022, 02:51 UTC≈3,640 views4 reactionsread 8 August 2026 श्रीकृष्ण बोले, तुमने जो व्रत लिया था, उसे अच्छी तरह निभाया है, इसमें सन्देह नहीं। परन्तु वस्त्रहीन होकर तुमने जल में स्नान किया है, इससे तो देवता का अपराध हुआ है। अतः अब इस दोष की निवृत्ति के लिये तुम अपने हाथ जोड़कर सिरसे लगाओ और उन्हें झुककर प्रणाम करो, तदनन्तर अपने-अपने वस्त्र ले जाओ। भगवान् श्रीकृष्ण की यह बात सुनकर उन व्रजकुमारियों ने ऐसा ही समझा कि वास्तव में वस्त्रहीन होकर स्नान करने से हमारे व्रत में त्रुटि …
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5 Sept 2022, 02:51 UTC≈4,060 views5 reactionsread 8 August 2026 करते, जप, कीर्तन, पूजन आदि करते हुए। सूकर को तो सूकरी की योनि में ही सुख मिलता है, अप्सरा से रमण करने का सुख वह क्या जाने! वही आपकी स्थिति है।
टीकाकारों का नाम भी बोल देते, ताकि लोग समझ लेते कि किनकी बात कर रहे हो। शंकराचार्य परम्परा से महान् संन्यासी श्रीधर स्वामी जी और भगवान् वैश्वानर के अवतार श्री वल्लभाचार्य जी ने भी टीका की है। रामभद्र के अनुसार तो ये दोनों अनपढ़ गधे थे, जो हिन्दू धर्म को बदनाम करना चाहते थे, इस…
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4 Sept 2022, 12:06 UTC≈1,690 views4 reactionsread 8 August 2026 प्रश्नकर्ता - श्री करपात्री स्वामी जी ने अपने वैदिक ग्रन्थों में पृथ्वी को अचला माना है। क्या यह अनुचित नहीं है ?
श्रीभागवतानंद गुरु - बैल को उतना ही गीत सुनाना चाहिए जितने में वह सींघ न मारे। करपात्री स्वामी जी क्या कर रहे हैं ? वेद का अर्थ बता रहे हैं। वेद क्या हैं ? शब्दब्रह्म , अपौरुषेय। उन्हें लिखा या बनाया नहीं गया। वे नित्य हैं , काल और देश से अतीत हैं , उन्हें बस विशेषज्ञों ऋषियों के द्वारा जाना गया और संसार…
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4 Sept 2022, 12:06 UTC≈1,960 views4 reactionsread 8 August 2026 इस गति का समर्थन ब्रह्माण्ड के मानवोत्तर प्रारूप का वर्णन करने वाले ब्रह्माण्डपुराण आदि में भी मिलता है और आधुनिक यन्त्रगत विज्ञान अपनी क्षमता के अनुसार इस गति को पहले ७२०,००० किमी प्रति घण्टे अर्थात् २०० किमी प्रति सेकंड मानता था, फिर उसमें सुधार करके ८१०,००० किमी प्रति घण्टे अर्थात् २२५ किमी प्रति सेकंड माना गया और अब (मेरी अद्यतित सूचना के आधार पर) लगभग ९००,००० किमी प्रति घण्टे अथवा २५० किमी प्रति सेकंड मानता है। …
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31 Aug 2022, 04:19 UTC≈1,330 viewsread 8 August 2026 श्रीरामभद्राचार्य के महिमामंडन में एक लेख आपने सोशल मीडिया पर अवश्य ही पढ़ा होगा जिसका सार यह था कि कैसे श्रीरामजन्मभूमि विवाद में न्यायालय के एक मुसलमान जज ने वेदों से प्रमाण माँगा था तब श्रीरामभद्राचार्य ने 'ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता' से प्रमाण दिया। कोर्ट के आदेश से 'ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता' मंगायी गयी और सारा प्रमाण अक्षरशः देखकर जज हैरान रह गया और इस प्रकार हिन्दुओं के पक्ष को श्रीरामभद्राचार्य के कारण बल मिला। अ…
31 Aug 2022, 04:19 UTC≈1,430 views4 reactionsread 8 August 2026 क्योंकि इसका निर्माण देवगण द्वारा हुआ है इसलिए इसका नाम 'देवपुरी' है। इसमें हृदय के दहराकाश के मध्य में जो ईश्वरांशभूत चेतन जीव विद्यमान है वही ज्योतियों से जाज्वल्यमान भली प्रकार गुप्त खजाना है। साक्षात् काल के द्वारा भी यह सर्वथा अजेय है (इस मानव देह को जब चाहे तब काल नहीं खा सकता) इसलिए ' योद्धुमशक्या ' - अयोध्या' ऐसा इसका अन्वर्थ नाम है।
यथा रूपकमाश्रित्य देहोऽयं साधु वर्णितः।
तथैव वर्ण्यतेऽयोध्या रामस्य पावनी प…
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Showing the 12 most recent of 20 posts we hold for @GandivasValour. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.