12 Aug 2026, 02:15 UTC130 views13 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय २, श्लोक ३
क्लैब्यं मा स्म गम: पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते |
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ||
अनुवाद: हे पार्थ! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, क्योंकि यह तुम्हें शोभा नहीं देता। हे शत्रु विनाशक! हृदय की तुच्छ दुर्बलता का त्याग कर उठ खड़े हो।
BG 2.3: O Partha! Do not yield to unmanliness, as it doesn't befit you. Give up this petty weakness of heart and arise, O scorcher of foes!
❤7🙏5🏆1
11 Aug 2026, 02:37 UTC332 views45 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय ९, श्लोक २२
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते |
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ||
अनुवाद: जो लोग केवल मुझ पर ध्यान केंद्रित करके मुझमें तल्लीन होकर मेरी पूजा करते हैं, मैं उन्हें वह प्रदान करता हूँ जिसकी उन्हें कमी है और जो उन्होंने पहले ही प्राप्त कर लिया है उसे संरक्षित करता हूँ।
BG 9.22: For those who worship me with minds focused on me alone and always immersed in me, I p…
🙏23❤19🏆1👏1🔥1
10 Aug 2026, 05:45 UTC442 views34 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय ११, श्लोक १०–११
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् |
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ||
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् |
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ||
अनुवाद: उस दिव्य विश्वरूप में, अर्जुन ने अनेकानेक मुखों और नेत्रों को देखा, जिनमें अनगिनत अद्भुत दृश्य थे और वो कई दिव्य आभूषणों से सुशोभित तथा कई दिव्य आयुधों को धारण किए हुए थे। दिव्य मालाओं तथा वस्त्रों को परिधान किए हुए दिव्य ग…
❤18🙏13🏆1👌1🔥1
9 Aug 2026, 04:17 UTC515 views29 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १, श्लोक ४०
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्मा: सनातना: |
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ||
अनुवाद: अर्जुन ने कहा, "कुल के नष्ट होने से सनातन कुलधर्म का नाश हो जाता है। धर्म का नाश होने से अधर्म संपूर्ण कुल पर हावी हो जाता है।"
BG 1.40: Arjuna said, "When the family line is destroyed, the eternal family dharma perishes. With the perishing of dharma, adharma dominates the entire family line."
🙏12❤10⚡4❤🔥1🏆1🔥1
8 Aug 2026, 02:38 UTC651 views33 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १०, श्लोक ३४
मृत्यु: सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् |
कीर्ति: श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति: क्षमा ||
अनुवाद: मैं सर्वभक्षी मृत्यु और भविष्य में होने वाले सभी घटनाओं का मूल हूँ। नारियों के गुणों में मैं कीर्ति, समृद्धि, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ।
BG 10.34: I am the all-devouring death and the origin of all future events. Among the virtues of women, I am fame, prosperity, spee…
🙏18❤10🔥2❤🔥1🏆1👏1
7 Aug 2026, 02:34 UTC763 views32 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय ८, श्लोक ५
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |
य: प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशय: ||
अनुवाद: जो व्यक्ति मृत्यु के समय मेरा ही स्मरण करते हुए शरीर त्याग देते हैं, वे निस्संदेह मेरे स्वरूप को प्राप्त होते हैं।
BG 8.5: One who departs from the body, remembering Me alone at the time of death, undoubtedly attains My state.
❤15🙏14🏆1👏1🔥1
6 Aug 2026, 15:23 UTC757 views34 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १२, श्लोक १३–१४
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्र: करुण एव च |
निर्ममो निरहङ्कार: समदु:खसुख: क्षमी ||
सन्तुष्ट: सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चय: |
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्त: स मे प्रिय: ||
अनुवाद: जो भूतमात्र के प्रति द्वेष रहित, मित्रवत और करुणामय हैं; अहंकार और ममता से मुक्त हैं; सुख-दुःख में समान हैं, और क्षमाशील हैं, तथा जो सदा संतुष्ट, संयमी, दृढ़ निश्चयी हैं, और जिनका मन-बुद्धि मुझमें अर्पित होता…
❤17🙏13❤🔥1🏆1👏1🔥1
5 Aug 2026, 12:24 UTC776 views32 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय ४, श्लोक ११
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् |
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: ||
अनुवाद: हे पार्थ! जिस प्रकार से लोग मेरी पूजा करते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार अनुग्रह करता हूँ; क्योंकि सब प्रकार से वे मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।
BG 4.11: O Partha! In whatever way people worship me, I favour them accordingly, as they follow My path in every way.
❤14🙏14🏆2👏1🔥1
4 Aug 2026, 01:37 UTC944 views34 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १६, श्लोक १-३
श्रीभगवानुवाच |
अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थिति: |
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ||
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्याग: शान्तिरपैशुनम् |
दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ||
तेज: क्षमा धृति: शौचमद्रोहोनातिमानिता |
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ||
अनुवाद: श्रीभगवान ने कहा, "हे भरतवंशी! भय का अभाव, मन की शुद्धि, ज्ञान और योग में स्थिरता, दान, आत्मसंयम, यज्ञ, शास्त्र…
🙏18❤13❤🔥1🏆1🔥1
3 Aug 2026, 14:34 UTC853 views32 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १०, श्लोक २५
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् |
यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालय: ||
अनुवाद: महर्षियों में मैं भृगु हूँ, शब्दों में मैं एकाक्षर (ॐ) हूँ, यज्ञों में मैं जप यज्ञ हूँ और अचलों में मैं हिमालय हूँ।
BG 10.25: Among the great sages, I am Bhrigu; among words, I am the single syllable (Om); among sacrifices (yajnas), I am the sacrifice of chanting (japa-yajna); among immovables…
🙏16❤14🏆1👌1
2 Aug 2026, 01:03 UTC≈1,010 views38 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय ५, श्लोक १८
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि |
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिता: समदर्शिन: ||
अनुवाद: ज्ञानीजन विद्या और विनय से संपन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, श्वान और श्वानभक्ष्यक चाण्डाल को भी समान दृष्टि से देखते हैं।
BG 5.18: The wise look equally upon a brahmin endowed with learning and humility, a cow, an elephant, a dog, as well as a dog-eating outcaste.
🙏19❤16🏆1👏1🔥1
1 Aug 2026, 00:56 UTC≈1,080 views35 reactionsread 12 August 2026 भगवद्गीता– अध्याय १८, श्लोक ६६
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज |
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच: ||
अनुवाद: सभी धर्मों का परित्याग करके केवल मुझमें शरण लो। मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूंगा; चिंता मत करो।
BG 18.66: Abandoning all dharmas, take refuge in Me alone. I shall liberate you from all sins; do not worry.
🙏18❤14🏆1👏1🔥1
Showing the 12 most recent of 23 posts we hold for @Bhagavad_Gita_Daily. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.