20 Aug 2026, 11:13 UTC188 views2 reactionsread 2 September 2026 अब इसे समझें कि मान लीजिए टीपू सुल्तान पराजित हो जाता, तब क्या होता? क्या हिन्दू शासन स्थापित हो रहा था?
नहीं। दरअसल मराठा सेना, निजाम की सेना और ब्रिटिश - ये तीन पक्ष संयुक्त होकर टीपू सुल्तान के विरुद्ध उस समय युद्ध लड़ रहे थे। तो राज्य को आपस में बाँटा जाता, न कि भगवा लहराया जाता। उस समय की राजनीति अत्यंत जटिल थी। बिना समझे मूर्ख यह अनुमान करते हैं कि एक तरफ हिन्दू योद्धा थे, दूसरी तरफ मुसलमान थे। ऐसा नहीं था।
और…
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20 Aug 2026, 11:13 UTC149 viewsread 2 September 2026 फिर आगे दयानन्दी - शांकर पीठ में किए गए - 'सहस्रचंडी' जाप व होम के पत्रों को प्रस्तुत करते हुए पूछ रहा है कि - "जिस शिवाजी के स्वराज्य का नाम लेकर शचीन्द्र शर्मा जी ज्ञान दे रहे हैं, अद्वैतियों के परमगुरु उसी स्वराज्य को नष्ट करने के लिए यज्ञ कर रहे थे।"
यहाँ भी हम कहेंगे कि इसने इस इतिहास को भी नहीं पढ़ा है। बस केवल यह पत्र पढ़कर निष्कर्ष निकाल लिया है। इतिहास पढ़ना या सत्य जानना इनका उद्देश्य नहीं होता है कभी। इनका …
20 Aug 2026, 11:13 UTC163 views3 reactionsread 2 September 2026 दयानन्द की उत्तराधिकारी परोपकारिणी सभा की पत्रिका में हमारे लिए एक लेख छापा गया। और जैसा कि पूर्व में भी हुआ है, हमारे पास नहीं भेजा गया। हमारे एक मित्र द्वारा सूचित किया गया। यह लेख जिस दयानंदी ने लिखा है उसनें हमारे लेख के पचासों प्रमाणों में से किसी पर बोलना उचित नहीं समझा, आक्षेप ही आक्षेप किए। उनके लेख के अंश ले-लेकर इसका उत्तर दिया जाता है-
आर्यसमाजी कृतेश पटेल लिखते हैं -- "जब मराठा हिन्दवी स्वराज्य के लिए…
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29 Jul 2026, 03:26 UTC434 views6 reactionsread 2 September 2026 Forwarded from @EsamidhaPhoto
ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम्।
मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा॥
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30 May 2026, 11:02 UTC≈1,090 views7 reactionsread 2 September 2026 Photo
असमाजी कमेंट करने के बाद सोचते होंगे कि इसकी पोस्ट पर तो कमेंट करना ही नहीं चाहिए था🤣🤣🤣
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13 Apr 2026, 12:03 UTC≈1,390 viewsread 2 September 2026 Forwarded from @EsamidhaPhoto
जय श्री राम
ऊपर जो प्रश्न (poll) आपने देखा।
वैसे प्रश्न प्रतिदिन whatsapp channel पर डालता हूं।
तो सभी वहां ज्वाइन करें।
https://whatsapp.com/channel/0029Va9zxwkKrWR3mk7dkO1Q
20 Oct 2025, 01:45 UTC≈2,190 views10 reactionsread 2 September 2026 Forwarded from @EsamidhaPhoto
नमस्ते सर्व देवानां वरदासि हरिप्रिये !
या गतिः त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्।।
E - समिधा के सभी सदस्यों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं🌸🌺🏵️
🙏7❤2🤣1
19 Sept 2025, 14:20 UTC≈2,170 views6 reactionsread 2 September 2026 Forwarded from @arya_samaj_book
क्या सायण ने ऋग्वेदभाष्य की भूमिका में ऋषियों का अस्तित्व स्वीकार किया है?
"जीवविशेषैरग्निवाय्वादित्यैर्वेदानामुत्पादितत्वात् । 'ऋग्वेद एवाग्नेरजायत यजुर्वेदो वायोः सामवेद आदित्यात्' ( ऐ० ग्रा० ५।३२) इति "
सायणकृत ऋग्वेद भाष्य भूमिका में यह शब्द पूर्वपक्ष वेदों का पौरुषेय सिद्ध करने हेतु कहता है। यह सायण का पक्ष नहीं है। पुनः यहाँ यह प्रश्न भी रहता है कि ऋषियों के लिये "जीवविशेष" ऐसा शब्द का प्रयोजन क्यों हुआ? ऋषि …
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12 Sept 2025, 04:50 UTC≈1,790 views5 reactionsread 2 September 2026 Forwarded from @EsamidhaPhoto
जब मैं और मेरा मित्र किसी विषय पर चर्चा कर रहे हो और बीच में कोई समाजी बोलने लगे तब हम दोनों का रिएक्शन😂😂🤣
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9 Sept 2025, 15:40 UTC≈1,720 views5 reactionsread 2 September 2026 अर्थात, ये सुवर्ण मेरा अविनाशी प्रकाश है। क्षेत्र से उत्पन्न होने वाला यह पक्व अन्न (पिण्ड), एवं गौ मेरी कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। इस (दक्षिणारूप हिरण्य-अन्न-गौ आदि) को मैं निधि रूप से ब्राह्मणों में प्रतिष्ठित करता हूँ। इन सब साधनों के द्वारा मैं पितरों के लिए वह मार्ग बनाता हूँ, जो सुखप्रद है।
यह मंत्र की उक्ति श्राद्ध करने वाले यजमान की है। दान, अन्न आदि मूलतः पितरों के लिए हैं। साथ ही दान में दी जाने वाली ग…
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9 Sept 2025, 15:40 UTC992 viewsread 2 September 2026 शचीन्द्र: श्राद्ध-सिद्धान्त में अन्न को पहुँचाने की बात तो है ही नहीं, यह तर्क मूर्खतापूर्ण कल्पना की उपज मात्र है। अन्न को नहीं, बल्कि अन्न के सोमभाग वा अतिशय भाग को पहुँचाया जाता है। यथा:
इ॒दं मे॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ हिर॑ण्यं प॒क्वं क्षेत्रा॑त्काम॒दुघा॑ म ए॒षा। इ॒दं धनं॒ नि द॑धे ब्राह्म॒णेषु॑ कृ॒ण्वे पन्थां॑ पि॒तृषु॒ यः स्व॒र्गः॥ (अथर्ववेद)
आर्यसमाजी: अच्छा, तो फिर सोमभाग या अतिशय को ही कैसे पहुँचाया जा सकता है? कौन औ…
9 Sept 2025, 15:40 UTC760 viewsread 2 September 2026 किन्तु कोई कहे कि प्रकृति-नियमानुसार ही क्षीणता की पूर्ति होती रहेगी, तो भी श्राद्ध व्यर्थ नहीं होगा। क्योंकि ऐसा मानने पर भी यदि वायुमण्डल की मात्रा ही उनमें बढ़ जाएगी और सूर्य-चन्द्र के अंश - बुद्धि या मन - वायु से आक्रान्त होकर दब जाएँगे, तो सूर्य-चन्द्र का आकर्षण उन पर न रहने से उनकी सूर्याभिमुख व चन्द्राभिमुख गति रुक जाएगी। विज्ञान के नियमानुसार सजातीय पर ही आकर्षण हो सकता है। मन और बुद्धि चन्द्रमा व सूर्य के अं…
Showing the 12 most recent of 20 posts we hold for @Aryavrata_History. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.